शारीरिक रूप से विकलांग के लिए सरकारी सुविधाएं | Govt facilities for physically handicapped

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Govt facilities for physically handicapped | विकलांग व्यक्तियों के लिए सरकारी सुविधाओं सम्बन्धी नियम

कार्मिक लोक शिकायत तथा पेंशन मंत्रालय, भारत सरकार के कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग के कार्यालय ज्ञापन दिनांक 31 मार्च, 2014 के द्वारा सरकार में पहले से नियोजित दिव्यांग व्यक्तियों के संबंध में उनके दायित्वों के प्रभावी रूप से निर्वहन करने के लिए कुछ सुविधाओं का प्रावधान करने संबंधी दिशा-निर्देश जारी किये गए है। दिव्यांगों (पीडब्ल्यूडी) को कुछ अतिरिक्त सहूलियत/सुविधाएं प्रदान करने के लिए दिशा-निर्देश जारी करने की आवश्यकता महसूस की गई है ताकि वे अपने कर्तव्यों का प्रभावी ढंग से निर्वहन करने में समर्थ बन सकें।

Govt facilities for physically handicapped:- नौकरियों की पहचान, भर्ती के बाद और पदोन्नति पूर्व प्रशिक्षण, सहायक उपकरण, निर्बाध पहुंच, स्थानांतरण/तैनाती में प्राथमिकता, विशेष आकस्मिक अवकाश आदि जैसी सुविधाओं को ऐसे क्षेत्रों के रूप में चिन्हित किया गया है जिन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। दिशा-निर्देशों में दर्शाई गई प्रस्तावित सुविधा भारत सरकार के मंत्रालयों/विभागों, उनके संबद्ध और अधीनस्थ कार्यालयों, केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, छावनी बोर्डों आदि में कार्यरत ऐसे कर्मचारियों के संबंध में लागू होनी चाहिए।

ऐसे दिव्यांग व्यक्तियों जो पहले से ही अपने कर्तव्यों के कुशल निर्वहन में नियोजित हैं, के संबंध में कुछ सुविधाएं प्रदान करने के लिए दिशा-निर्देशों को अंतिम रूप देने हेतु एक अंतर-मंत्रालयी समिति का गठन किया गया था। हितधारकों के साथ हुई चर्चाओं और हितधारकों से प्राप्त सुझावों के आधार पर, दिव्यांग व्यक्तियों को कुछ सहूलियत/सुविधाएं (Govt facilities for physically handicapped) प्रदान करने के लिए निम्नलिखित दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं: –

(क) नौकरियों की पहचान

भारत सरकार के प्रत्येक मंत्रालय/विभाग, उनके सम्बद्ध और अधीनस्थ कार्यालयों, केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, छावनी बोर्डों आदि को उन नौकरियों के प्रकारों की पहचान करनी चाहिए जिन्हें दिव्यांगों द्वारा आसानी से किया जा सकता है विशेष रूप से समूह ख, ग और घ पदों के लिए जहां नौकरियों की संख्या अधिक है। ऐसे व्यक्तियों को प्राथमिक रूप से ऐसी चिन्हित नौकरियों के निष्पादन के लिए तैनात किया जाना चाहिए और जहां तक संभव हो, उन्हें ऐसी नौकरियों का निष्पादन करते रहने की अनुमति दी जानी चाहिए। यदि संबंधित दिव्यांग (पीडब्ल्यूडी) अधिकारी ऐसे सभी कार्य कर सकता है जो सामान्य व्यक्ति कर सकते हैं अथवा कई प्रकार के कार्य कुशलतापूर्वक कर सकता है, तो उन्हें केवल कुछ निश्चित प्रकार की नौकरियों के लिए निर्देश देने के लिए कोई प्रयास नहीं किया जाना चाहिए।

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(ख) भर्ती उपरांत और पदोन्नति पूर्व प्रशिक्षण

सरकारी सेवा में प्रवेश के समय प्रशिक्षण प्राप्त करना एक कर्मचारी की सेवा-आवश्यकता का एक अनिवार्य घटक है। दिव्यांग व्यक्तियों के लिए इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को अन्य कर्मचारियों के साथ-साथ प्रदान किया जाना चाहिए। नौकरी विशिष्ट भर्ती उपरांत और पदोन्नति पूर्व प्रशिक्षण कार्यक्रम दिव्यांग व्यक्तियों के लिए आयोजित किए जाने की आवश्यकता है। दिव्यांग व्यक्तियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम हेतु एक ऐसे विशिष्ट मॉड्यूल/मानक की रूपरेखा तैयार करना संभव नहीं हो सकता है जो सभी मंत्रालयों/विभागों और उनके सम्बद्ध/अधीनस्थ कार्यालयों, केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, छावनी बोर्ड आदि के लिए एक समान हो, क्योंकि प्रशिक्षण की आवश्यकता में कार्य पद्धति के आधार पर अंतर हो सकता है। सभी मंत्रालयों/विभागों को अन्य कर्मचारियों के साथ दिव्यांग व्यक्तियों के लिए कार्य विशिष्ट समावेशी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने के लिए निश्चित कार्रवाई करनी चाहिए।

दिव्यांगजन कार्य विभाग, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय संस्थानों के साथ विचार-विमर्श करके प्रशिक्षण अवधि और विषय वस्तु को अंतिम रूप प्रदान किया जा सकता है, यदि ऐसा आवश्यक प्रतीत हो तो दिव्यांगता के क्षेत्र में कार्यरत प्रतिष्ठित एसोसिएशन/फेडरेशन/कनफेडरेशन से भी परामर्श लिया जा सकता है। यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि प्रशिक्षण कार्यक्रमों को रोजगार में परिवर्तन, नई प्रौद्योगिकियों के आगमन, कर्मचारी की पदोन्नति आदि के पश्चात संचालित किया जाए। प्रशिक्षण का स्थल वह हो जो ऐसे प्रशिक्षण के संचालन के लिए उपयुक्त समझा जाए। मंत्रालयों/विभागों तथा उनके कार्यालय प्रशिक्षण कार्यक्रमों से संबंधित कार्य करने के लिए मौजूदा बजट प्रावधानों का उपयोग करेंगे।

दिव्यांग कर्मचारी को पद का कार्यभार पुनः संभालने पर कम से कम एक महीने के लिए अनुभवी कर्मचारी के साथ तैनात किया जाएगा। इससे दिव्यांग कर्मचारी को अपने दायित्व को निभाने के लिए आवश्यक कौशल सीखने में मदद मिलेगी और यह कर्मचारी को उस तरह से भी ढालने में सहायक होगा जैसा कि वैयक्तिक मामलों में आवश्यक हो।

(ग) सहायता सामग्री/सहायक उपकरण प्रदान करना

दिव्यांग व्यक्ति अपने दायित्वों का निर्वहन प्रभावी रूप से कर सकता है यदि उन्हें उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप सहायता सामग्री और उपकरण प्रदान किए जाएं। मंत्रालयों/विभागों और उनके सम्बद्ध एवं अधीनस्थ कार्यालयों, केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, कंटोनमेंट बोर्ड आदि को दिव्यांगजन कर्मचारियों की आवश्यकता के अनुसार उन्हें हाईटेक/नवीनतम प्रौद्योगिकी चालित सहायक उपकरण (बैटरी सहित लो विजन सहायक उपकरण, श्रवण उपकरण समेत), विशेष फर्नीचर, व्हीलचेयर (मोटरचालित यदि कर्मचारी द्वारा मांगा जाए), सॉफ्टवेयर स्कैनर्स, कंप्यूटर और अन्य हार्डवेयर आदि प्रदान करके उनकी सहायता करनी चाहिए इससे उनकी कार्यकुशलता बढ़ेगी।

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मंत्रालय/विभाग को दिव्यांगता के क्षेत्र में कार्यरत विभिन्न राष्ट्रीय संस्थानों के साथ परामर्श करके उनके द्वारा यथानिर्धारित विशेष उपकरणों, विशेष फर्नीचर, सॉफ्टवेयर, स्कैनर्स, कंप्यूटर और अन्य हार्डवेयर आदि के मूल्य/मजबूती के अनुसार विशिष्ट समय सीमा के साथ दिव्यांगजन व्यक्तियों के लिए ऐसे उपकरण प्रदान करने चाहिए अथवा ऐसे उपकरणों की लागत प्रतिपूर्ति करनी चाहिए। प्रत्येक 3 वर्ष पर विभाग/मंत्रालय द्वारा एक समीक्षा की जानी चाहिए ताकि ऐसे उपकरणों/सॉफ्टवेयर आदि के बेहतर/उन्नत वर्जन की उपलब्धता अथवा आवश्यकता का पता लगाया जा सके। मंत्रालय/विभाग इन सुविधाओं को प्रदान करने के लिए अपने मौजूदा बजटीय प्रावधानों का उपयोग करेंगे।

(घ) कार्यस्थल पर सुगम पहुंच और बाधारहित वातावरण

दिव्यांगजन अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार दिव्यांगों के लिए सुगम पहुंच और बाधारहित वातावरण प्रदान करने के लिए सरकारी कार्यालयों सहित सभी सार्वजनिक भवनों में सुधार करने संबंधी दिशा-निर्देशों के अतिरिक्त, सभी सरकारी कार्यालयों को दिव्यांगजन कर्मचारियों को बाधारहित एवं सुगम कार्य स्थल प्रदान करने, मुख्य भवन से उनके वर्क स्टेशन तक सुगम पहुंच प्रदान करने और शौचालय आदि जैसी सामान्य सुविधाओं तक पहुंच प्रदान करने के लिए विशेष कदम उठाने चाहिए। ब्रेल चिह्न और ऑडियो निर्देश की सुविधा प्रदान करके लिफ्ट/एलीवेटर को सुगम बनाया जाना चाहिए। जहां कहीं भी आवश्यक हो, अल्प दृष्टि कर्मचारियों के लिए भवन, सार्वजनिक सुविधाओं, सीढ़ियों आदि में समुचित रूप से अलग-अलग रंग की व्यवस्था की जानी चाहिए।

(ड़) सरकारी आवास में वरीयता

संपदा निदेशालय दिव्यांगजनों को उनकी तैनाती के स्थान के पास सुगम स्थान पर आवास प्रदान करने के लिए उन्हें वरीयता दे सकता है और उन्हें भू-तल आवास आवंटन हेतु वरीयता दी जा सकती है। मौजूदा आवासों का नवीनीकरण कर दिव्यांगजनों के उन्हें सुविधाजनक रूप से सुगम बनाने की संभाव्यता पर संपदा निदेशालय द्वारा काम किया जाए।

(च) शिकायत निवारण

दिव्यांगजनों सहित कुछ कर्मचारियों को दिव्यांगजनों से संबंधित शिकायतों के निपटान में उनके कौशलों को विकसित करने के लिए दिव्यांगता के क्षेत्र में कार्यरत पैनलबद्ध किए गए मास्टर प्रशिक्षकों/विभिन्न राष्ट्रीय संस्थानों के कार्यालयों द्‌वारा प्रशिक्षित किया जा सकता है। अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षण मामलों की देखरेख करने के लिए नियुक्त संपर्क अधिकारी दिव्यांगजनों से संबंधित आरक्षण मामलों के लिए संपर्क अधिकारी के रूप में काम कर सकता है। संपर्क अधिकारी दिव्यांगजनों के लिए सुविधाएं प्रदान करने से संबंधित मुद्दों की भी देखरेख करेगा।

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इसके अतिरिक्त, प्रत्येक मंत्रालय/विभाग उनके संबद्ध और अधीनस्थ कार्यालय, केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, कैंटोनमेंट बोर्ड आदि प्रशासनाध्यक्ष की अध्यक्षता में दिव्यांगता मामलों में जानकारी रखने वाले एक दिव्यांग व्यक्ति सहित कम से कम दो कर्मचारियों वाले शिकायत निपटान तंत्र गठित करेंगे। इस प्रकार गठित समिति शिकायतों को प्राप्त करेगी और तर्कसंगत समय सीमा के भीतर उनका निपटान करने का प्रयास करेगी।

(छ) विशेष आकस्मिक छुट्टी

सम्बन्धित विभाग के कार्यालय ज्ञापन संख्या 25011/1/2008-स्था. (क) दिनांक 19.11.2008 के माध्यम से कर्मचारी की दिव्यांगता से संबंधित विशिष्ट आवश्यकताओं के लिए दिव्यांग केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों हेतु एक कैलेंडर वर्ष में 4 दिनों के विशेष आकस्मिक अवकाश का प्रावधान किया गया है। इसके अतिरिक्त, सम्बन्धित विभाग के कार्यालय ज्ञापन संख्या 28016/02/2007-स्था. (क) दिनांक 14.11.2007 के माध्यम से सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा विनिर्दिष्ट किए जाने वाले दिव्यांग और विकास से संबंधित सम्मेलनों/सेमिनारों/प्रशिक्षणों/कार्यशालाओं में भाग लेने के लिए दिव्यांगता से प्रभावित केंद्र सरकार के दिव्यांग कर्मचारियों हेतु कार्य की आवश्यकता के अध्यधीन एक कैलेंडर वर्ष में 10 दिनों की विशेष आकस्मिक छुट्टी का भी प्रावधान है।

(ज) स्थानांतरण/तैनाती में वरीयता

जहां तक संभव हो, दिव्यांगजनों को चक्रानुक्रम स्थानांतरण नीति/स्थानांतरण से मुक्त रखा जाए और उन्हें वही काम करते रहने की अनुमति प्रदान की जाए जहां वे वांछित कार्यनिष्पादन कर सकें। इसके अतिरिक्त, प्रशासनिक सुविधा के अध्यधीन स्थानांतरण/पदोन्नति के समय दिव्यांगजनों को तैनाती के स्थान पर वरीयता दी जाए। दिव्यांगजनों के मामले में तैनाती के स्थान के चुनाव पर विचार करने की रीति को जारी रखा जाए। जहां तक संभव हो, उन्हें उसी कार्य में बनाए रखा जाए जहां उनकी सेवाओं को सर्वोत्तम रूप से उपयोग में लाया जा सके।

प्रत्येक मंत्रालय/विभाग दिव्यांगजनों के लिए मुख्य आयुक्त के कार्यालय के परामर्श से संपर्क अधिकारी के लिए “दिव्यांगता समानता और शिष्टाचार” विषय पर प्रशिक्षण की व्यवस्था करेगा।

सभी मंत्रालयों/विभागों से अनुरोध है कि वे उपर्युक्त अनुदेशों को सूचना एवं अनुपालन के लिए अपने नियंत्रणाधीन सभी नियुक्ति प्राधिकारियों के संज्ञान में लाएं। लोक उद्यम विभाग उपर्युक्त दिशा-निर्देशों को सभी केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में प्रभावी बनाना सुनिश्चित करें।

सम्पूर्ण जानकारी के लिए आप नीचे दिए गए लिंक से उक्त नियम की प्रति प्राप्त कर सकते हैं।


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