परिवीक्षा अवधि और स्थायीकरण नियम | Probation period and confirmation rules

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Probation period and confirmation rules | सरकारी कर्मचारियों हेतु परिवीक्षा अवधि और स्थायीकरण के सम्बन्ध में नियम

कार्मिक लोक शिकायत तथा पेंशन मंत्रालय, भारत सरकार के कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग के कार्यालय ज्ञापन दिनांक 11 मार्च, 2019 के द्वारा केन्द्रीय सेवाओं में परिवीक्षा/स्थायीकरण पर समेकित परिपत्र के संबंध में कार्यालय ज्ञापन संख्या 28020/1/2010-स्था.(ग) दिनांक 21.07.2014 का संदर्भ लिया जा सकता है जिसमें परिवीक्षा/स्थायीकरण पर समेकित अनुदेश जारी किए गए थे। इस संबंध में और स्पष्टता तथा संदर्भ-सुलभता प्रदान करने के लिए समेकित परिपत्र के रूप में परिवीक्षा/स्थायीकरण के संबंध में अनुदेशों/दिशानिर्देशों को पुन समेकित/संशोधित करने का निर्णय लिया गया है।

उपरोक्त कार्यालय ज्ञापन दिनांक 21.07.2014 के तहत जारी किए गए समेकित परिपत्र को आज की तारीख तक उपयुक्त रूप से अद्यतन किया गया है और इसकी प्रति संलग्न है। इस समेकित परिपत्र के लिए अनुदेशों के समेकन हेतु संदर्भित कार्यालय ज्ञापनों की सूची परिशिष्ट में दी गई है।

केन्द्रीय सेवाओं में परिवीक्षा और स्थायीकरण पर समेकित परिपत्र

परिवीक्षा

1. किसी सेवा में नियुक्त किए गए व्यक्ति को उस सेवा में आमेलन हेतु उसकी उपयुक्तता का मूल्यांकन करने के लिए परिवीक्षा पर नियुक्त किया जाता है। इसीलिए परिवीक्षा को केवल औपचारिकता नहीं माना जाना चाहिए। परिवीक्षा पर नियुक्ति के संबंध में कोई औपचारिक घोषणा आवश्यक नहीं होगी। नियुक्ति प्राधिकारी निष्पादन के मूल्यांकन के आधार पर परिवीक्षा की अवधि को सफलतापूर्वक पूरा करने की घोषणा कर सकता है या इसे बढ़ा सकता है या परिवीक्षाधीन किसी अस्थायी कर्मचारी की सेवाओं को बर्खास्त कर सकता है।

2. सीधी भर्ती, एक समूह से दूसरे समूह में पदोन्नति अथवा अधिवर्षिता की आयु से पूर्व पुनर्नियोजित किए गए अधिकारियों के लिए परिवीक्षा का निर्धारण किया गया है। लिखित-आदेश जारी करने पर परिवीक्षा को सफलतापूर्वक पूरा किया हुआ माना जाएगा। तथापि, किसी सरकारी सेवक को लंबी अवधि के लिए परिवीक्षा पर रखना वांछनीय नहीं है।

3. परिवीक्षा को एक औपचारिकता मानने के बजाय, परिवीक्षाधीन अधिकारियों/कर्मचारियों को कार्यमुक्त करने की मौजूदा शक्तियों का प्रयोग नियमानुसार और सशक्त रूप से किया जाना चाहिए ताकि बाद के स्तरों पर कर्मचारियों की सेवाओं को समाप्त करने की आवश्यकता कदाचित ही उत्पन्न हो।

4. परिवीक्षा संबंधी अथवा विभागीय परीक्षा, यदि लागू हो, उत्तीर्ण करने की परिवीक्षाधीन अधिकारी/कर्मचारी की योग्यता पर सावधानीपूर्वक ध्यान देना स्थायीकरण हेतु पात्रता का एक अनिवार्य भाग होना चाहिए, लेकिन किसी परिवीक्षाधीन अधिकारी/कर्मचारी को स्थायी किए जाने के पूर्व सेवा में किए जाने वाले कार्य संबंधी दृष्टिकोण, चरित्र और अभिक्षमता का सावधानी-पूर्वक मूल्यांकन किया जाना चाहिए।

5. परिवीक्षाधीन अधिकारी कर्मचारी को इस परिवीक्षा-अवधि के दौरान एक से अधिक अधिकारी के अधीन कार्य करने का अवसर दिया जाना चाहिए तथा उनमें से प्रत्येक अधिकारी से उसके कार्य की रिपोर्ट प्राप्त की जाए। तत्पश्चात्‌ यह विनिर्धारण करने के लिए कि संबंधित परिवीक्षाधीन अधिकारी/कर्मचारी सेवा में स्थायी किए जाने के लिए उपयुक्त है या नहीं, संपूर्ण अवधि की परिवीक्षा रिपोर्टों पर वरिष्ठ अधिकारियों के बोर्ड द्वारा विचार किया जाए। इस उद्देश्य के लिए, रिपोर्ट के अलग-अलग प्रपत्रों का प्रयोग किया जाना चाहिए जो सामान्य वार्षिक कार्यनिष्पादन मूल्यांकन रिपोर्ट (एपीएआर) प्रपत्रों से भिन्न हों।

एपीएआर के विपरीत, परिवीक्षा-अवधि की रिपोर्टों को पर्यवेक्षक अधिकारी को परिवीक्षा की विशेष आवश्यकताओं पर ध्यान केन्द्रित करने में मदद करने और यह निर्णय करने के लिए लिखा जाता है कि क्या उस अधिकारी द्वारा परिवीक्षा-अवधि अथवा परिवीक्षा की विस्तारित अवधि के दौरान किया गया कार्य और आचरण उसे सेवा या पद में आगे बनाए रखने हेतु प्रामाणिक ठहराने के लिए पर्याप्त रूप से संतोषप्रद है या नहीं।

इस प्रकार, परिवीक्षा-अवधि की रिपोर्ट उस उद्देश्य को पूरा नहीं करतीं जिसे एपीएआर पूरा करती हैं तथा एपीएआर उस उद्देश्य को पूरा नहीं करती, जिसे परिवीक्षा-रिपोर्ट पूरा करती हैं। अतः सभी परिवीक्षाधीन अधिकारियों/कर्मचारियों अथवा परिवीक्षाधीन अधिकारियों के मामले में, परिवीक्षा-अवधि के लिए सामान्य एपीएआर के अतिरिक्त पृथक परिवीक्षा-अवधि रिपोर्ट लिखीं जानी चाहिए।

6. आपवादिक कारणों को छोड़कर, परिवीक्षा को एक वर्ष से अधिक समय के लिए बढ़ाया नहीं जाना चाहिए तथा किसी भी परिस्थिति में, किसी भी कर्मचारी को सामान्य अवधि से दोगुने समय के लिए परिवीक्षा पर नहीं रखा जाना चाहिए।

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7. संतोषजनक प्रगति नहीं कर रहे परिवीक्षाधीन कार्मिक को उसकी त्रुटियों के बारे में मूल परिवीक्षा अवधि के समाप्त होने से काफी पहले सूचित कर दिया जाना चाहिए ताकि वह स्वयं को सुधारने के लिए विशेष प्रयास कर सके। इस कार्य को एक लिखित चेतावनी के द्वारा किया जा सकता है जिसमें यह उल्लेख होगा कि उनका सामान्य कार्य निष्पादन ऐसा नहीं रहा है जिससे उनके स्थायीकरण का समर्थन हो और यदि वे विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर पर्याप्त सुधार नहीं कर पाए, तो उनकी कार्यमुक्ति के संबंध में विचार किया जाएगा।

यद्यपि इन नियमों के अनुसार इसकी आवश्यकता नहीं है, चूंकि सेवा से कार्यमुक्त किया जाना एक कठोर, अंतिम और अटल कदम है, अतः परिवीक्षाधीन कार्मिक को कार्यभार मुक्त किए जाने जैसा कठोर कदम लेने से पूर्व एक अवसर प्रदान किया जाना चाहिए।

8. परिवीक्षा अवधि की संतोषजनक समाप्ति की शर्त के रूप में, परिवीक्षाधीन अवधि अथवा उस पर दिए गए किसी विस्तार के दौरान, आवेदक को सरकार की अपेक्षानुसार ऐसे प्रशिक्षण एवं निर्देशन प्राप्त करना होगा तथा परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी (जिसमें हिंदी में परीक्षा भी शामिल है) जो सरकार को उचित लगे।

अनिवार्य प्रवेशन प्रशिक्षण

9. सीधी भर्ती के सभी मामलों में कम से कम दो सप्ताह का एक अनिवार्य प्रवेशन प्रशिक्षण होना चाहिए। उक्त प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूरा किया जाना परिवीक्षा अवधि की समाप्ति के लिए पूर्व-अपेक्षा बना दिया जाए। इस प्रशिक्षण का पाठ्यक्रम संवर्ग प्राधिकरणों द्वारा कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग के प्रशिक्षण प्रभाग के साथ परामर्श करके निर्धारित किया जाए। उन सभी पदों के लिए भर्ती नियमों को संशोधित की जाए जहां ऐसे प्रावधान पहले से मौजूद नहीं हैं और भर्ती नियमों में ऐसे अनिवार्य प्रशिक्षण प्रदान करने के प्रावधान किए जाएं। भर्ती नियमों का संशोधन किए जाने तक उपर्युक्त के लिए नियुक्ति प्रस्ताव में एक उपबंध शामिल किया जाए।

परिवीक्षा की अवधि

10. केन्द्र सरकार में विभिन्न पदों/सेवाओं के लिए परिवीक्षा अवधि निम्नलिखित पंक्तियों में निर्धारित की गई हैं:-

पदोन्नति
क्रम संख्यानियुक्ति की पद्धतिपरिवीक्षा की अवधि
1.एक ग्रेड से अन्य ग्रेड में पदोन्नति परन्तु पदों के समान समूह के भीतर जैसे समूह “ग” से समूह ‘ग’ में।परिवीक्षा की आवश्यकता नहीं।
2.एक समूह से अन्य में पदोन्नति जैसे समूह ‘ख’ से समूह ‘क’।उच्चतर पदों में सीधी भर्ती हेतु निर्धारित परिवीक्षा की अवधि। यदि कोई अवधि निर्धारित नहीं की गयी है तब यह 2 वर्ष की अवधि होनी चाहिए।
सीधी भर्ती
क्रम संख्यानियुक्ति की पद्धतिपरिवीक्षा की अवधि
3.(i) केवल निम्न खंड (ii) के अलावा पदों में सीधी भर्ती हेतु2 वर्ष
(ii) 7600 रू. अथवा इससे अधिक ग्रेड वेतन वाले पदों अथवा उन पदों में सीधी भर्ती हेतु जिसमें अधिकतम आयु 35 वर्ष अथवा उससे अधिक हो और जहाँ किसी प्रशिक्षण की आवश्यकता नहीं है।
नोट: प्रशिक्षण में ‘कार्यगत प्रशिक्षण’ अथवा संस्थागत प्रशिक्षण’ शामिल है।
1 वर्ष
4.अधिवर्षिता की आयु प्राप्त होने से पूर्व पुन: नियुक्त किये गए अधिकारी2 वर्ष
5.संविदा आधार पर, कार्यकाल आधार पर नियुक्ति, सेवानिवृत्ति और आमेलन के पश्चात् पुनः नियुक्तिकोई परिवीक्षा अवधि नहीं।
(क) किसी अन्य पद पर उसी विभाग अथवा अन्य विभाग में सीधी भर्ती

यदि किसी सरकारी सेवक को सीधी भर्ती द्वारा उसी विभाग में अथवा अन्य विभाग में अन्य पद पर नियुक्त किया जाता है तब इस बात को ध्यान में रखे बिना कि वह अधिकारी पूर्ववर्ती पद पर मूल रूप से कार्यरत था, उसे सीधी भर्ती द्वारा नए पद पर नियुक्त किए जाने वाले पद पर स्थायीकरण हेतु उस पर विचार किया जाना अपेक्षित होगा।

इसके अतिरिक्त, नए ग्रेड में स्थायीकरण इसलिए आवश्यक हो जाता है क्योंकि नया पद उस पुराने पद के उसी क्रम अथवा कार्यक्षेत्र के समान नहीं हो सकता जिस पर वे स्थायी कर दिए गए थे और यह तथ्य कि पुराने पद पर सेवा जारी रखने के लिए उन्हें उपयुक्त पाया गया था (जो उस पद पर उनके स्थायीकरण के आधार पर हुआ था) अपने-आप उन्हें नए पद पर कार्यरत रहने अथवा स्थायीकरण के लिए पात्र नहीं बना था, क्योंकि नए पद की कार्य अपेक्षाएं पुराने पदों से भिन्न हो सकती है।

(ख) पदोन्नति

(i) पदोन्नति द्वारा नई सेवा में नियुक्त किए गए लोगों को भी परिवीक्षा में रखा जाएगा। एक ग्रेड से अन्य ग्रेड में परन्तु पदों के उसी समूह में पदोन्नति होने पर कोई परिवीक्षा नहीं होगा परन्तु यदि पदोन्नति में उसी सेवा में पदों के समूह में परिवर्तन होता है जैसे समूह “ख’ से समूह ‘क’ में पदोन्नति के मामले में परिवीक्षा निर्धारित अवधि के लिए होगी।

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(ii) स्थायी पदों की उपलब्धता से स्थायीकरण को डीलिंक करने के निर्णय के परिणामस्वरूप यह भी निर्णय लिया गया था कि यदि भर्ती नियम कोई परिवीक्षा निर्धारित नहीं करती है, तब नियमित आधार पर नियुक्त/पदोन्नत अधिकारी (निर्धारित डीपीसी प्रणाली आदि का पालन करने के पश्चात) को वे सभी लाभ मिलेंगे जो उस ग्रेड में स्थायी अधिकारी को मिलने चाहिए।

परिवीक्षा पर रहने वाले परिवीक्षाधीन व्यक्ति को छुट्टी

11. परिवीक्षाधीन व्यक्ति सीसीएस (छुट्टी) नियमावली, 1972 के नियम 33 के प्रावधानों के तहत छुट्टी के लिए अधिकारी होंगे। यदि किसी भी कारण से किसी परिवीक्षाधीन व्यक्ति की सेवा को समाप्त करने का प्रस्ताव किया जाता है, तब उस स्थिति में, उसे प्रदान की जाने वाली कोई भी छुट्टी:-

(i) पहले से यथा संस्वीकृत अथवा विस्तारित या समाप्त हो रही परिवीक्षा अवधि से आगे की अवधि के लिए नहीं दी जाएगी; अथवा

(ii) पहले की ऐसी किसी तारीख से आगे नहीं दी जाएगी जिससे उसकी सेवाओं को उसको नियुक्त करने वाले किसी सक्षम प्राधिकारी के आदेशों द्वारा समाप्त कर दिया गया हो।

12. परिवीक्षा पर किसी पद पर नियुक्त किया गया व्यक्ति किसी अस्थाई अथवा स्थाई पद पर अपनी नियुक्ति के अनुसार अस्थाई अथवा स्थायी सरकारी सेवक के रूप में इन नियमों के तहत छुट्टी के लिए हकदार होगा; बशर्ते कि जहां ऐसा व्यक्ति ऐसी नियुक्ति से पूर्व किसी स्थाई पद पर पहले से ही लियन पर हो वहां वह एक स्थाई सरकारी सेवक के रूप में इन नियमों के तहत अवकाश का हकदार होगा।

13. जहां तक परिवीक्षाधीन को बालचर्या छुट्टी का संबंध है, सीसीएल को ऐसी कुछ आपवादिक परिस्थितियों को छोड़कर, जहां छुट्टी संस्वीकृत करने वाले प्राधिकारी परिवीक्षाधीन कार्मिक को बालचर्या छुट्टी की आवश्यकता से पूर्णतया संतुष्ट हों, सामान्यतया परिवीक्षा अवधि के दौरान सीसीएल प्रदान नहीं किया जाए। यह भी सुनिश्चित किया जाए कि परिवीक्षा के दौरान मंजूर की गई इस छुट्टी की अवधि न्यूनतम ही हो। इसके अतिरिक्त, सीसीएस (छुट्टी) नियमावली, 1972 के नियम 43-ग में समाविष्ट अन्य उपबंध भी लागू रहेंगे।

14. स्थानांतरण पर कार्यभार ग्रहण करने के लिए सरकारी सेवकों को लोकहित में समय प्रदान किया जाता है। छुट्टी से लौटने पर परिवीक्षाधीन द्वारा कार्यभार ग्रहण करने की अवधि की गणना परिवीक्षा की निर्धारित अवधि में की जाए, परंतु छुट्टी के लिए, वह उस पद जिस पर उसकी नियुक्ति की गई थी में ही स्थानापन्न करना जारी रखेगा।

परिवीक्षा अवधि को बढ़ाना

15. यदि परिवीक्षा अवधि के दौरान, कोई परिवीक्षाधीन कार्मिक अपेक्षित पाठ्यक्रम पूरा नहीं करता है अथवा अपेक्षित निर्धारित विभागीय परीक्षा (हिंदी में दक्षता इत्यादि) यदि कोई है, को उत्तीर्ण नहीं करता है तो परिवीक्षा की अवधि को यथा आवश्यक अवधि अथवा अवधियों तक बढ़ाया जा सकता है बशर्ते कि यह कुल अवधि परिवीक्षा की निर्धारित अवधि से दोगुनी नहीं होनी चाहिए।

16. यदि नियुक्ति प्राधिकारी यह उपयुक्त मानता है तो वह सरकारी सेवक की परिवीक्षा की अवधि को विशिष्ट अवधि तक बढ़ा सकता है परंतु परिवीक्षा की कुल अवधि सामान्य अवधि से दुगनी नहीं होनी चाहिए। ऐसे मामलों में, आवधिक रूप से समीक्षाएं की जाएं और परिवीक्षा अवधि विस्तार एक बार में दीर्घ अवधि के लिए नहीं होना चाहिए।

17. जहां यदि किसी परिवीक्षाधीन कार्मिक ने केंद्र सरकार की संतुष्टि की सीमा तक परिवीक्षा अवधि को पूरा कर लिया है तो उसे स्थायी किया जाना आवश्यक होता है, उसे परिवीक्षा को संतोषजनक रूप से पूरा करने पर अपनी परिवीक्षा अवधि की समाप्ति पर सेवा/पद में स्थायी किया जाएगा।

18. कुछ कर्मचारी परिवीक्षा अवधि के दौरान दीर्घकालीन छुट्टी लेने के कारण परिवीक्षा को पूरा नहीं कर पाते हैं। ऐसे मामलों में यदि कोई कर्मचारी नियमों के तहत परिवीक्षाधीन कार्मिक को यथा अनुमेय किसी भी प्रकार की छुट्टी के कारण परिवीक्षा के लिए निर्धारित कुल अवधि का 75 प्रतिशत पूरा नहीं करता है तब उस स्थिति में उसकी परिवीक्षा अवधि को ली गई छुट्टी की अवधि तक बढ़ाया जा सकता है, परंतु यह अवधि परिवीक्षा की निर्धारित अवधि से दोगुनी नहीं होगी।

परिवीक्षा की समाप्ति

19. क्या किसी कर्मचारी को स्थायी किया जाए अथवा नहीं अथवा उसके परिवीक्षा को बढ़ाया जाए अथवा नहीं, यह निर्णय कर्मचारी की आरंभिक परिवीक्षा अवधि की समाप्ति के तुरंत पश्चात अर्थात छह अथवा आठ सप्ताह के भीतर लिया जाए और अवधि-विस्तार की स्थिति में कर्मचारी को कारणों सहित लिखित रूप में संप्रेषित किया जाए। संतोषजनक प्रगति नहीं कर रहे अथवा स्वयं को सेवा के लिए अपर्याप्त दर्शाने वाले परिवीक्षाधीन को उसकी कमियों को मूल परिवीक्षा अवधि की समाप्ति से पर्याप्त पूर्व ही सूचित किया जाए ताकि वह स्वयं को सुधारने के लिए विशेष प्रयास कर सके।

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20. परिवीक्षा अवधि के समाप्त होने पर, परिवीक्षाधीन पर मूल्यांकन रिपोर्टों को प्राप्त करने के लिए कदम उठाए जाएं ताकि:-

(i) यदि परिवीक्षा को सक्षम प्राधिकारी की संतुष्टि के अनुसार पूरा कर लिया गया है तो परिवीक्षाधीन को स्थायी किया जा सके/परिवीक्षा के संतोषजनक रूप से समाप्ति संबंधी आदेश जारी किया जा सके, जैसा भी मामला हो; अथवा

(ii) संगत नियमों और आदेशों के अनुसार परिवीक्षा अवधि को बढ़ाना अथवा परिवीक्षाधीन को कार्यमुक्त करना अथवा परिवीक्षाधीन की सेवाएं समाप्त करना, जैसा भी मामला हो, यदि परिवीक्षाधीन ने परिवीक्षा अवधि को संतोषजनक रूप से पूरा नहीं किया हो।

21. यह सुनिश्चित करने के लिए कि स्थायीकरण में कोई विलंब न हो, अग्रिम रूप से समय पर कार्यवाही शुरू अवश्य कर दी जाए ताकि समय-सीमा का अनुपालन किया जा सके।

22. यदि सक्षम प्राधिकारी को किसी भी समय, परिवीक्षा अवधि के दौरान अथवा समाप्ति पर यह प्रतीत होता है कि सरकारी सेवक ने अपने अवसरों का पर्याप्त रूप से उपयोग नहीं किया है अथवा संतोषजनक प्रगति नहीं कर रहा है, तब नियुक्ति प्राधिकारी उसे उसकी नियुक्ति से पूर्व उसके द्वारा धारित मूल पद पर तत्काल प्रत्यावर्तित कर सकता है, बशर्तें कि वह उस पद पर लियन रखता हो अथवा अन्य मामलों में उसे सेवा से कार्यमुक्त कर सकता है अथवा सेवा से हटा सकता है।

23. परिवीक्षा अवधि के दौरान अथवा समाप्ति पर सेवा से प्रत्यावर्तित अथवा कार्यमुक्त किया गया परिवीक्षाधीन, किसी भी क्षतिपूर्ति का हकदार नहीं होगा।

स्थायीकरण

24. स्थायीकरण को ग्रेड में उपलब्ध स्थायी रिक्तियों से अलग किया गया है। अर्थात यदि कोई अधिकारी उचित नियमों के तहत अपनी परिवीक्षा अवधि को सफलतापूर्वक पूरा करता है तो उसे स्थायी करने पर विचार किया जाए। स्थायी रिक्तियों की उपलब्धता से स्थायीकरण को अलग किए जाने के उपर्युक्त निर्णय के फलस्वरूप यह स्पष्ट होता है कि स्थायीकरण किसी अधिकारी के सेवाकाल में केवल एक बार ही किया जाएगा जो ग्रेड पद/सेवा/संवर्ग के प्रवेश स्तर पर होगा बशर्ते यदि किसी अन्य पद ग्रेड/सेवा/संवर्ग में सीधी भर्ती या अन्य किसी माध्यम से नया प्रवेशन होता है तो स्थायीकरण आवश्यक होगा। यदि मामले में, जैसा भी मामला हो, सभी दृष्टिकोणों से कोई आपत्ति न हो, तो स्थायीकरण का एक विशिष्ट आदेश जारी किया जाना चाहिए।

25. किसी अधिकारी की परिवीक्षा अथवा विस्तारित परिवीक्षा, जैसा भी मामला हो, के दौरान यदि सरकार का ऐसा मत है कि कोई अधिकारी स्थायी नियुक्ति के लिए योग्य नहीं पाया जाता है तो सरकार उसे या तो सेवामुक्त कर सकती है अथवा सेवा में उसकी नियुक्ति से पहले उसके द्वारा धारित पद पर प्रत्यावर्तित कर सकती है।

26. यदि पदोन्नति पर परिवीक्षा निर्धारित है तो निर्धारित परिवीक्षा अवधि के पूरा होने पर नियोक्ता प्राधिकारी परिवीक्षा अधिकारी के आचरण तथा कार्य का मूल्यांकन स्वयं करेगा और उच्च ग्रेड के लिए उपयुक्त पाए जाने पर वह यह घोषित करते हुए एक आदेश जारी करेगा कि संबंधित अधिकारी ने सफलतापूर्वक परिवीक्षा को पूरा कर लिया है।

यदि नियोक्ता प्राधिकारी का यह मत है कि परिवीक्षा अधिकारी का कार्य संतोषजनक नहीं है अथवा कुछ समय और देखा जाना चाहिए तो वह मामले के अनुसार जिस पद/ग्रेड/संवर्ग से वह पदोन्नत हुआ है उसे प्रत्यावर्तित कर सकता है अथवा परिवीक्षा अवधि का विस्तार कर सकता है। यदि संबंधित अधिकारी का कार्य संतोषजनक नहीं है जिस ग्रेड/पद/संवर्ग से वह पदोन्नत हुआ है तो परिवीक्षाधीन को उस ग्रेड/पद/संवर्ग में वापस भेजने के लिए कोई संशय नहीं होना चाहिए।

27. स्थायीकरण की प्रभावी तिथि वही होनी चाहिए जो परिवीक्षा अवधि अथवा विस्तारित परिवीक्षा अवधि, जैसा मामला हो, को सफलतापूर्वक पूरा करने की हो। परिवीक्षाधीन अधिकारी को स्थायी करने अथवा उसके परिवीक्षा के विस्तारण के निर्णय को सामान्यतः 6 से 8 सप्ताह के भीतर सूचित किया जाना चाहिए। परिवीक्षा की अवधि को एक वर्ष से अधिक विस्तारित नहीं किया जाना चाहिए और किसी भी परिस्थिति में कर्मचारी को निर्धारित परिवीक्षा अवधि से दोगुनी अवधि तक परिवीक्षा में नहीं रखा जाना चाहिए।

किसी अधिकारी को परिवीक्षा अवधि को सफलतापूर्वक पूरा किया माना जाएगा यदि निर्धारित परिवीक्षा अवधी की सामान्य अवधि की दोगुनी अवधि के बीतने के आठ सप्ताहों के भीतर अधिकारी के स्थायीकरण, कार्यमुक्त करने अथवा प्रत्यावर्तित करने संबंधी कोई आदेश जारी नहीं किया जाता है।

28. स्थानातंरण से नियुक्त कोई सरकारी कर्मचारी यथोचित रूप से पहले ही स्थायी हो चुका है तो ऐसे मामले में नए पद पर स्थायीकरण की आवश्यकता नहीं है तथा उसे नए पद पर स्थायी माना जाएगा। हालांकि, यदि किसी सरकारी सेवक की नियुक्ति स्थानातंरण से हुई है और वह अपने पुराने पद पर स्थाई नहीं है तो नए पद पर उसका स्थायीकरण आवश्यक होगा।

ऐसे मामले में दो वर्ष की निगरानी के उपरांत ही उसके स्थायीकरण पर विचार किया जाए। इन दो वर्षों की अवधि के दौरान, अधिकारी नए ग्रेड में दो रिपोर्ट प्राप्त करेगा और इन एपीएआर के आधार पर डीपीसी उसके स्थायीकरण के मामले पर विचार कर सकता है।

परिशिष्ट

क्रम संख्याकार्यालय ज्ञापन संख्याविषय
1.28020/1/2017-स्था.(ग)
दिनांक 05.10.2017
परिवीक्षा अवधि के दौरान ली गई छुट्टी के मद्देनज़र परिवीक्षा का विस्तार
2.28020/1/2010-स्था.(ग)
दिनांक 30.10.2014
परिवीक्षा अनापत्ति के लिए अनिवार्य प्रवेशन प्रशिक्षण का प्रारंभ
3.28020/1/2010-स्था.(ग)
दिनांक 21.07.2014
केंद्रीय सेवाओं में परिवीक्षा/स्थायीकरण संबंधी समेकित अनुदेश
4.18011/1/2010-स्था.(ग)
दिनांक 30.08.2010
विभिन्न केंद्रीय सेवाओं में समय पर स्थायीकरण
5.18011/2/98-स्था.(ग)
दिनांक 28.08.1998
विभिन्न केंद्रीय सेवाओं में समय पर स्थायीकरण
6.21011/1/94-स्था.(ग)
दिनांक 20.04.1995
विभिन्न केंद्रीय सेवाओं में परिवीक्षा
7.20011/5/90-स्था.(ग)
दिनांक 04.11.1992
वरिष्ठता को स्थायीकरण से पृथक करना
8.18011/3/88-स्था.(घ)
दिनांक 24.09.1992
संशोधित स्थायीकरण प्रक्रिया के आलोक में स्थानांतरण आधार पर नियुक्त हुए व्यक्ति का स्थायीकरण
9.21011/2/89-स्था.(ग)
दिनांक 26.04.1989
सीधी भर्ती से नियुक्त किए गए ऐसे व्यक्तियों के मामले में परिवीक्षा जिनकी उपरी आयु सीमा 35 वर्ष और इससे अधिक है
10.18011/1/86-स्था.(घ)
दिनांक 28.03.1988
स्थायीकरण की प्रक्रिया का सरलीकरण – वरिष्ठता को स्थायीकरण से पृथक करना
11.21011/3/83-स्था.(ग)
दिनांक 05.12.1984
विभिन्न केंद्रीय सेवाओं में परिवीक्षा
12.21011/3/83-स्था.(ग)
दिनांक 24.02.1984
विभिन्न केंद्रीय सेवाओं में परिवीक्षा
13.21011/2/80-स्था.(ग)
दिनांक 19.05.1983
विभिन्न केंद्रीय सेवाओं में परिवीक्षा
14.44/1/59-स्था.(क)
दिनांक 15.04.1959
विभिन्न अखिल भारतीय सेवाओं और केंद्रीय सेवाओं में परिवीक्षा पर दस्तावेज – मंत्रालयों आदि में सिफारिशों का संचलन
15.दिनांक 19.09.2022सीसीएस (छुट्टी) नियमावली – 1972

सम्पूर्ण जानकारी के लिए आप नीचे दिए गए लिंक से उक्त नियम की प्रति प्राप्त कर सकते हैं।


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