संतान शिक्षा भत्ता एवं छात्रावास परिदान प्रदान करने सम्बन्धी नए नियम | Children Education Allowance and hostel Subsidy rules

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Children Education Allowance and hostel Subsidy rules | संतान शिक्षा भत्ता एवं छात्रावास परिदान प्रदान करने सम्बन्धी नए नियम – सभी आदेशों का संकलन

कार्मिक लोक शिकायत तथा पेंशन मंत्रालय, भारत सरकार के कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग के कार्यालय ज्ञापन दिनांक 17 जुलाई 2018 के अनुसार संतान शिक्षा भत्ता एवं छात्रावास सब्सिडी विषय पर पूर्ववर्ती सभी कार्यालय ज्ञापनों के अधिक्रमण में निम्नलिखित समेकित अनुदेश जारी करने का निर्णय लिया गया।

क) संतान शिक्षा भत्ता (C.E.A.) और छात्रावास सब्सिडी (Hostel Subsidy) के दावे की प्रतिपूर्ति दो बड़े जीवित बच्चों (दूसरे बच्चे के जन्म के समय जुड़वा/अनेक बच्चों के जन्म के मामले को छोड़कर) के लिए की जा सकती है। संतान शिक्षा भत्ता और सब्सिडी, यदि नसबंदी ऑपरेशन सफल ना रहे, तो सामान्य दो बच्चों के मापदंड से परे ऐसी विफलता को पहली घटना से जन्मे बच्चों के मामले में ही स्वीकार्य होगी।

ख) संतान शिक्षा भत्ता (children education allowance) की प्रतिपूर्ति की राशि प्रति बच्चा रुपया 2,250/- प्रति माह नियत होगी। यह राशि रुपया 2,250/- प्रति माह निर्धारित की गई है, भले ही सरकारी सेवक द्वारा वास्तविक रुप से खर्चे की राशि कुछ भी हो। संतान शिक्षा भत्ता की प्रतिपूर्ति का दावा करने के लिए सरकारी सेवक को दावा की गई अवधि/वर्ष के लिए अपनी संस्था के प्रधान द्वारा जारी प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना चाहिए। इस प्रमाण पत्र में इस बात की पुष्टि की जानी चाहिए कि उस बच्चे ने पिछले शैक्षिक वर्ष के दौरान उस स्कूल में अध्ययन किया है। यदि ऐसा प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं किया जा सके तो रिपोर्ट कार्ड की स्वप्रमाणित प्रति या स्वप्रमाणित शुल्क रसीद (ई-रसीद सहित) समस्त शैक्षिक वर्ष में शुल्क जमा की गई है, की पुष्टि इंगित करते हुए संतान शिक्षा भत्ता का दावा करने के लिए संदर्भित दस्तावेज के रूप में प्रस्तुत की जा सकती है। अवधि/वर्ष का अर्थ है शैक्षिक वर्ष अर्थात पूरे शैक्षणिक सत्र के बारह माह।

ग) छात्रावास सब्सिडी की राशि की उच्चतम सीमा रुपया 6,750/- प्रतिमाह है। किसी शैक्षिक वर्ष में छात्रावास सब्सिडी की प्रतिपूर्ति का दावा करने के लिए संस्था के प्रधान से इसी प्रकार का प्रमाण पत्र प्राप्त करना पर्याप्त होगा जिसमें यह पुष्टि की गई हो कि उस बच्चे ने उस स्कूल में इस दौरान अध्ययन किया है, इसके अतिरिक्त यह भी अपेक्षा होगी कि उस प्रमाण पत्र में सरकारी सेवक द्वारा आवासीय परिसर में ठहरने और खाने-पीने पर व्यय की गई राशि का उल्लेख किया जाए। यदि ऐसा प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं किया जा सके तो रिपोर्ट कार्ड और मूल शुल्क रसीद अथवा ही रसीद की स्वप्रमाणित प्रति छात्रावास सब्सिडी का दावा करने के लिए प्रस्तुत की जा सकती है जिसमें सरकारी सेवक द्वारा आवासीय परिसर में ठहरने और खाने-पीने पर व्यय की गई राशि इंगित होनी चाहिए। खाने-पीने और ठहरने पर हुआ व्यय या रूपया 6,750/- की अधिकतम सीमा जैसा कि ऊपर उल्लेख किया गया है, जो भी कम हो, उस कर्मचारी को छात्रावास सब्सिडी के रूप में भुगतान की जाएगी। अवधि/वर्ष का अर्थ वही होगा जैसा कि इस पैरा के खण्ड (ख) में स्पष्ट किया गया है।

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घ) सरकारी कर्मचारियों के दिव्यांग बच्चों के लिए संतान शिक्षा भत्ते की प्रतिपूर्ति उपर्युक्त खंड (ख) में निर्धारित संतान शिक्षा भत्ता (children education allowance) की साधारण दरों से दोगुनी अर्थात रूपया 4,500 प्रतिमाह (निर्धारित) की दर से की जाएगी।

ड़) संशोधित वेतन संरचना के 50% तक बढ़ जाने पर उपर्युक्त दरें/अधिकतम सीमा स्वतः 25% बढ़ जाएगी।

च) छात्रावास सब्सिडी एवं संतान शिक्षा भत्ता का दावा साथ-साथ किया जा सकता है।

छ) यदि पति एवं पत्नी दोनों सरकारी सेवक है तो उनमें से एक ही संतान शिक्षा भत्ता एवं छात्रावास सब्सिडी के अधीन प्रतिपूर्ति का लाभ ले सकता है।

ज) संतान शिक्षा भत्ता एवं छात्रावास सब्सिडी की प्रतिपूर्ति किसी वित्तीय वर्ष में वित्तीय वर्ष पूरा होने के बाद एक बार ही की जा सकती है।

झ) छात्रावास सब्सिडी ऐसे बच्चे के सम्बन्ध में ही लागू होगी जब बच्चा सरकारी सेवक के निवास स्थान से कम से कम 50 कि.मी. की दूरी पर स्थित आवासीय शैक्षणिक संस्थान में अध्ययन कर रहा हो।

न) संतान शिक्षा भत्ता एवं छात्रावास सब्सिडी की प्रतिपूर्ति का बच्चे की कक्षा में उसके कार्य निष्पादन से कोई सम्बन्ध नहीं होगा। अन्य शब्दों में यदि कोई बच्चा किसी कक्षा विशेष में अनुत्तीर्ण हो जाता है तो संतान शिक्षा भत्ता अथवा छात्रावास सब्सिडी की प्रतिपूर्ति रोकी नहीं जाएगी। तथापि, यदि बच्चे को दूसरे स्कूल में उसी कक्षा में प्रवेश दिलाया जाता है, हालांकि वह पिछले स्कूल में उस कक्षा में उत्तीर्ण हो चुका है या सत्र के बीच में प्रवेश दिलाया जाता है तो संतान शिक्षा भत्ता की प्रतिपूर्ति नहीं की जाएगी।

ट) यदि किसी सरकारी सेवक का निधन सेवा में रहते हुए हो जाता है तो उसके बच्चों को स्वीकार्य संतान शिक्षा भत्ता अथवा छात्रावास सब्सिडी देय होगी जो इसे प्रदान करने के लिए अन्य शर्तों का अनुपालन करने के अधीन होगी, बशर्ते कि दिवंगत व्यक्ति का पति अथवा पत्नी केंद्र सरकार, राज्य सरकार, स्वायत्तशासी निकाय, सार्वजनिक उपक्रम अथवा केंद्र सरकार अथवा राज्य सरकार द्वारा आंशिक रूप से अथवा पूर्णतया वित्त पोषित अन्य किसी संगठन की सेवा में परिनियोजित न हो। ऐसे मामलों में, बच्चों का संतान शिक्षा भत्ता एवं छात्रावास सब्सिडी तब तक की जाती रहेगी जब तक कर्मचारी वास्तविक रूप से उन्हें प्राप्त करता रहेगा, यह इस शर्त के अधीन होगा कि अन्य निबंधन एवं शर्तें पूरी की गयी हो। भुगतान उस कार्यालय द्वारा किया जाएगा जिसमे सरकारी कर्मचारी अपनी मृत्यु से पूर्व कार्यरत था और यह इस कार्यालय ज्ञापन में निर्धारित अन्य शर्ताें से विनियमित होगा।

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ठ) सेवानिवृत्ति, कार्य मुक्ति, बर्खास्तगी अथवा निष्कासन की स्थिति में, संतान शिक्षा भत्ता अथवा छात्रावास सब्सिडी उस शैक्षिक वर्ष की समाप्ति तक स्वीकार्य रहेगी जिसमें सरकारी सेवक सेवानिवृत्ति, शैक्षिक वर्ष के दौरान कार्यमुक्ति, बर्खास्तगी अथवा निष्कासन के कारण सेवा में नहीं रहेगा। भुगतान उस कार्यालय द्वारा किया जाएगा जिसमें सरकारी कर्मचारी उक्त घटनाओं से पूर्व कार्यरत था और इस कार्यालय ज्ञापन में निर्धारित अन्य शर्तों से विनियमित होगा।

ड) दिव्यांग बच्चों के लिए ऊपरी सीमा 22 वर्ष निर्धारित की गई है। अन्य बच्चों के मामले में आयु सीमा 20 वर्ष अथवा 12 वीं श्रेणी उत्तीर्ण करने के समय, जो भी पहले हो, तक रहेगी। कोई न्यूनतम आयु नहीं होगी।

ढ) संतान शिक्षा भत्ता और छात्रावास सब्सिडी की प्रतिपूर्ति नर्सरी से 12वीं कक्षा तक के बच्चों के लिए लागू होगी, जिसमें कनिष्ठ महाविद्यालय अथवा विश्वविद्यालयों अथवा शिक्षा बोर्डों से सम्बद्ध जूनियर कॉलेजो अथवा स्कूलों द्वारा आयोजित 11वीं और 12वीं कक्षा में शामिल होंगी।

ण) ‘पत्राचार अथवा दूरस्थ शिक्षण’ के माध्यम से अध्ययन करने वाले बच्चों के मामले में संतान शिक्षा भत्ता की अनुमति है जो इसमें निर्धारित अन्य शर्तों के अधीन होगी।

त) संतान शिक्षा भत्ता और छात्रावास सब्सिडी की प्रतिपूर्ति नर्सरी एक से पूर्व दो कक्षओं से 12वीं कक्षा तक अध्ययन करने वाले बच्चों के लिए और यदि बच्चा दसवीं कक्षा उत्तीर्ण करने के पश्चात पाठ्यक्रम में प्रवेश लेता है और सरकारी सेवकों 11वीं और 12वीं कक्षाओं में अध्ययन करने वाले बच्चों के लिए संतान शिक्षा भत्ता अथवा छात्रावास सब्सिडी प्रदान नहीं की गई हो तो पॉलिटेक्निक/आईटीआई/इंजीनियरिंग कॉलेज से किसी डिप्लोमा/सर्टिफिकेट कोर्स के बारे में 2 वर्षों के लिए भी स्वीकार्य है।

थ) नर्सरी, प्राइमरी और मिडिल स्तर पर किसी भी शिक्षा बोर्ड से सम्बद्ध नहीं होने वाले विद्यालयों/संस्थानों के संबंध में, किसी मान्यता प्राप्त विद्यालय/संस्थान में अध्ययन करने वाले बच्चों के लिए स्कीम के तहत प्रतिपूर्ति की अनुमति दी जाएगी। इस संबंध में मान्यता प्राप्त विद्यालय/संस्थान का अर्थ होगा सरकारी विद्यालय अथवा कोई शिक्षा संस्थान चाहे वह सरकारी सहायता प्राप्त करता हो अथवा नहीं, केंद्र अथवा राज्य सरकार अथवा संघ राज्य क्षेत्र अथवा विश्वविद्यालय द्वारा मान्यता प्राप्त अथवा किसी मान्यता प्राप्त शैक्षिक प्राधिकरण द्वारा मान्यता प्राप्त, जिसकी अधिकारिता उस क्षेत्र पर हो जहां संस्थान विद्यालय स्थित हो।

फ) यदि दिव्यांग बच्चा किसी संस्थान अर्थात केंद्र अथवा राज्य सरकार अथवा संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन द्वारा सहायता प्राप्त अथवा उनके द्वारा अनुमोदित संस्था में अध्ययन कर रहा है अथवा जिसके शुल्क का अनुमोदन इन प्राधिकारियों में से किसी एक ने किया है, तो सरकारी सेवक द्वारा भुगतान किए गए संतान शिक्षा भत्ते की प्रतिपूर्ति की जाएगी, भले ही वह संस्था ‘मान्यता प्राप्त’ हो अथवा ना हो, ऐसे मामलों में बच्चे के 22 वर्ष की आयु प्राप्त होने तक लाभ होगा।

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भ) संतान शिक्षा भत्ता (children education allowance) नेपाल और भूटान के नागरिकों, जो भारत सरकार के कर्मचारी हैं, और जिनके बच्चे पैतृक स्थान में अध्ययन कर रहे हैं, सहित सभी केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बच्चों के लिए देय है। तथापि, संबंधित इंडियन मिशन से एक प्रमाण पत्र प्राप्त करना होगा कि विद्यालय को ऐसे शैक्षिक प्राधिकरण द्वारा मान्यता प्रदान की गई है, जिसकी अधिकारिकता उस क्षेत्र पर भी है, जहां संस्था स्थित है।

म) किसी सरकारी सेवक को संतान शिक्षा भत्ता अथवा छात्रावास सब्सिडी तभी देय होगी जब वह ड्यूटी पर हो अथवा निलंबन के अधीन हो अथवा छुट्टी (असाधारण सामान्य छुट्टी सहित) पर हो। बशर्ते कि ऐसी किसी अवधि जिसे ‘अकार्य दिवस’ के रूप में माना गया हो, के दौरान सरकारी सेवक उस अवधि के लिए संतान शिक्षा भत्ता एवं छात्रावास सब्सिडी के लिए पात्र नहीं होगा।

यह आदेश 1 जुलाई 2017 से प्रभावी होंगे।

सम्पूर्ण जानकारी के लिए आप नीचे दिए गए लिंक से उक्त नियम की प्रति के साथ उपरोक्त नियम से सम्बन्धित विभिन्न प्रश्नों एवं उनके जवाब भी प्राप्त कर सकते हैं।


  • सरकारी कर्मचारी के पहले बच्चे के लिए सरकार की तरफ से खर्चा देने के लिए कोई योजना है

    हाँ. पढाई के लिए खर्चा देने हेतु उपरोक्त नियम का सन्दर्भ लिया जा सकता है. संतान शिक्षा भत्ता एवं छात्रावास परिदान प्रदान करने सम्बन्धी नए नियम | Children Education Allowance and hostel Subsidy rules

  • children education allowance complete rules?

    children education allowance rules complete details are already given above. Please go through it to know everything above it.

  • Study jab Tak karte rahenge tabtak mil sakta hai

    No. Only up to the 12th class.

  • What if I enroll my child in government school where fees is zero

    As per para b) of this rule, the amount of Rs. 2,250/- is fixed irrespective of the actual expenses incurred by the Govt. Servant. You may submit self-attested copy of the report card as a supporting document to claim Children Education Allowance.

2 thoughts on “संतान शिक्षा भत्ता एवं छात्रावास परिदान प्रदान करने सम्बन्धी नए नियम | Children Education Allowance and hostel Subsidy rules”

  1. Agar mere 2 bacche hai aur mere ghar se 70 km dur English medium school private me first aur second class me study kr rahe hai aur waha hostel me rah rahe hai to mai central government employees hone ke karan hostel subsidy ke liye apply kr sakta hu kay

    1. Haa ji aap apply kar sakte hai. As per the OM dated May 31, 2012, The term Hostel Subsidy would mean expenses incurred by the Government servant if he/she keeps his/her children in a hostel of a residential school/institution located beyond a distance of 50 kilometers from his/her residence.

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